पत्र लेखन – Patra Lekhan (Letter Writting)

पत्र लेखन :- मनुष्य सामाजिक प्राणी होने के नाते अपने जन्म से मृत्यु पर्यंत अपने भावों और विचारों को दूसरों तक संप्रेषित करता है। आदि काल में मनुष्य ढोल बजाकर चिल्ला कर या आग जलाकर अपने संदेश अपने मित्रों या परिचितों तक पहुंचाता था। आज का युग सूचना क्रांति का युग है, संदेश संप्रेषण के कई साधन आज हमारे पास उपलब्ध है। इन अत्याधुनिक साधनों को अपनाते हुए भी पत्र का महत्व है।

कई बार वह अपने स्वजनों को बधाई वह शुभकामना प्रेषण के लिए पत्र लिखता है, तो कई बार रोजगार के लिए आवेदन पत्र लिखता है। कभी किसी कार्य के न हो पाने पर शिकायती पत्र या सरकारी कामकाजों के संपादन के लिए भी एक कर्मचारी को नित्य प्रति कई प्रकार के पत्र लिखने होते हैं। इसी कारण संदेश प्रेषण के कितने ही अत्याधुनिक विकल्प उपस्थित होने के बावजूद पत्र लेखन का आज भी अपना महत्व है, लेकिन वास्तव में पत्र लेखन भी एक कला है।

अच्छे पत्र की विशेषताएं :-

एक अच्छे एवं प्रभावी पत्र में निम्नलिखित विशेषता होती है :-

1. सरलता :- एक अच्छे पत्र की भाषा सरल होनी चाहिए जिससे कि प्राप्तकर्ता को संदेश सरलता से संप्रेषित हो सकें उसमें कठिन भाषा में नहीं होनी चाहिए।

2. स्पष्टता :- एक अच्छे पत्रिका प्रमुख गुण स्पष्टता होता है। पत्र लेखक को अपनी बात इतनी स्पष्ट लिखनी चाहिए कि प्राप्तकर्ता आपके संदेश को स्पष्ट रुप से ग्रहण करें।

3. संक्षिप्तता :- पत्र में संक्षिप्तता का गुण भी होता है। पत्र लेखक को अपनी बात कम शब्दों में पूरी करने का प्रयास करना चाहिए। कई बार हम एक ही बात को अलग-अलग शब्दों में पुनः लिखते जाते हैं। इस वृत्ति से हमें बचना चाहिए।

4. क्रमबद्धता :- पत्र लेखक को अपने पत्र लेखन में क्रमबद्धता का भी ध्यान रखना चाहिए। जब एक ही पत्र में एकाधिक बातें लिखी जाने हो तब पहले महत्वपूर्ण बातों को लिखते हुए फिर सामान्य बातों की और बढ़ना चाहिए, साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक बार जब लिखना प्रारंभ करें तब उसे पूरी तरह पूर्ण करने के बाद ही दूसरे विषय पर लिखना आरंभ करना चाहिए।

5. संपूर्णता :- पत्र लेखक को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वह जो-जो संदेश संप्रेषित करना चाहता है, वह सब उसने उस पत्र में समाहित कर दिए हो कोई भी विषय या बात लिखने से नहीं रह जाए।

6. प्रभावशीलता :- पत्र ऐसा होना चाहिए, कि वह पाठक या प्राप्त करता पर अपना प्रभाव छोड़े। इसके लिए पत्र लेखक को प्रभावी भाषा के साथ-साथ प्रभावी शैली को अपनाना चाहिए।

7. बाह्य सज्जा :- उपयुक्त विशेषताओं के साथ बाह्य सज्जा का भी पत्र लेखन मैं अपना महत्व होता है। इस हेतु निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  1. कागज अच्छे किस्म का हो।
  2. लिखावट सुंदर व स्पष्ट हो।
  3. वर्तनी की त्रुटियां न हो।
  4. विराम चिह्नों का उचित प्रयोग।
  5. तिथि, अभिवादन, अनुच्छेद का उचित प्रयोग आदि।

1. व्यक्तिगत या पारिवारिक पत्र :- किसी व्यक्ति द्वारा जब अपने परिवारजनों या मित्रों को कोई पत्र लिखा जाता है तो उसे व्यक्तिगत या पारिवारिक पत्र कहते हैं। पिता माता या मित्र को पत्र बधाई पत्र निमंत्रण पत्र और संवेदना पत्र व्यक्तिगत या पारिवारिक पत्रों की श्रेणी में आते हैं।

2. कार्यालयी पत्र :- वह पत्र जो किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को किसी विशेष राजकीय कार्य को करने या जानकारी देने हेतु लिखे जाते हैं, वह कार्यालय या सरकारी पत्र कहलाते हैं।

जैसे :- सामान्य सरकारी पत्र, परिपत्र, अधिसूचना, अनुस्मारक, विज्ञप्ति, कार्यालय आदेश, ज्ञापन, निविदा आदि।

3. व्यावसायिक पत्र :- किसी व्यावसायिक संस्था द्वारा किसी अन्य व्यावसायिक संस्था को व्यावसायिक कार्य हेतु लिखा गया पत्र व्यावसायिक पत्र कहलाता है। इस प्रकार के पत्र द्वारा व्यवसायिक पूछताछ मूल्य जानकारी सामान क्रय विक्रय पहुंच आदि के विषय में पत्राचार किया जाता है।

Leave a Comment